प्रश्न / उत्तर

प्रश्न-1 राजसूय यज्ञ का ठाट-बाट तथा पांडवों की यश समृद्धि का दुर्योधन पर क्या प्रभाव पड़ा?

 

प्रश्न-2 दुर्योधन के कहने पर धृतराष्ट्र पांडवों को चौसर के खेल में बुलाने के लिए क्यों मान गए?

 

प्रश्न-3 जुए के खेल के संबंध में विदुर की क्या राय थी?

 

प्रश्न-4 शकुनि ने दुर्योधन को पांडवों पर विजय पाने का कौन सा उपाय बताया?

 

प्रश्न-5  युद्ध की संभावना ही मिटा देने के उद्देशय से युधिष्ठिर ने क्या शपथ ली?

 

प्रश्न-6 शकुनि ने दुर्योधन को किस प्रकार सांत्वना दिया?

 

प्रश्न-7 किसने किससे  कहा?

i. “चौसर का खेल कोई हमने तो ईजाद किया नहीं है। यह तो हमारे पूर्वजों का ही चलाया हुआ है।”

ii. “राजन, सारे वंश का इससे नाश हो जायेगा।”

iii. “युद्ध की तो बात ही न करो। वह खतरनाक काम है। तुम पांडवों पर विजय पाना चाहते हो, तो युद्ध के बजाए चतुराई से काम लो।”

iv. “बेटा! यों चिंतित और उदास क्यों खड़े हो? कौन सा दुख तुमको सता रहा है?”

 

Last modified: Saturday, 29 December 2018, 4:22 PM